Wednesday, December 10, 2014

मोहब्बत से मिलो तुझमें समा जाएगी दुनिया

२०१४ के शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी और मलाला को ढेरों बधाई -



नफ़रत से देखोग तो नफरत दिखाएगी दुनिया
मोहब्बत से मिलो तुझमें समा जाएगी दुनिया

अमन और चैन की हवा हर ओर चलती है
चाहोगे तो हर एक दिवार गिराएगी दुनिया

कोई कमज़ोर कहीं अकेला छूट न जाये
औरों को संभालोगे तो तुम्हे संभालेगी दुनिया

सत्य किसी गुफा में छुप कर नहीं बैठता
अपने नक़ाब हटाओ सत्य दिखाएगी दुनिया

जिन्हे ज़रुरत है संग उनके त्यौहार मनाओ
तुम्हारे जीवन को उत्सव बनाएगी दुनिया

- शादाब
10/12/2014

Monday, December 8, 2014

हाँ बना दो भागवद गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ

हमें ज़ख्म का पता नहीं, दर्द अपना कभी जाना नहीं 
और वो मरहम की नुमाईश कर मशहूर हुए जा रहे हैं

हाँ बना दो भागवद गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ
अब तो देश अपना खुशहाल हो ही गया है
सबको भरपेट खाना मिल ही रहा है
देश की संप्रभुता पूरी तरह सुरक्षित है ही
संसद में सब खुश है
हरेक मुद्दे को पूरा विमर्श करके निपटा दिया गया है
और अब बाकी कुछ नहीं रहा!

हाँ बना दो भागवद गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ
ताकि जब कोई मस्जिद में नमाज़ अदा करने जाये
तो साथ रखे गीता, अपने माथे से लगा कर झुके
ताकि राष्ट्र का सम्मान हो सके और धर्मनिरपेक्ष बना रहे !

और जब कोई चर्च में प्रेयर करने जाये
तो पॉकेट में रखे गीता पॉकेट एडिशन वाला
ताकि कैंडल जलाते वक़्त भी उसे याद रहे
कि वो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट में शरण लिए हुए है !

जब आतंकवादियों से मुठभेड़ हो
तो सेना गीता का कवच पहन कर लड़े
मजाल है कि एक भी गोली भेद कर जाये !

जब चीनी सिपाही देश में अतिक्रमण करें
तो भारतीय सेना साथ ले चले अपना राष्ट्रिय ग्रन्थ
पूजा अर्चना करें फिर बन्दूक उठाये
ताकि राष्ट्र का अपनमान न हो और हम धर्म निरपेक्ष देश बने रहे !

जब कोई पेड़ पे मज़बूर हो कर झूलना चाहे
तो भी साथ रखे गीता
ताकि पता चल सके कि भूखे होने का अपराधी इसी राष्ट्र का था
और उसपे करवाई हो सके, कमिटी बन सके
कि यूँ खुले में प्राण त्यागने वाले ने बिना परमिशन कूच क्यूँ किया !

और जब दुनिया का सबसे महँगे से महँगा घर की तामीर हो
तो उसका शिलान्यास  के वक़्त पढ़ा जाए गीता
ताकि पता चल सके इस राष्ट्र के महलों में भी लोग
राष्ट्र से जुड़े हुए हैं और धर्म निरपेक्ष है !

हाँ कर दो जो अब तक न हुआ
जो अनंत काल का ऋण अबके आपके कंधे पे आया है
जो सवा सौ करोड़ लोगों की मूलभूत ज़रुरत है
उसकी अदायगी आप समय रहते कर दो
कौन जाने कल हो न हो !
ऊपर जवाब तलब हो गया तो !

Thursday, December 4, 2014

संसद में अल्टरनेटिव एनर्जी सोर्स "चिल्लाना" का सफल परिक्षण

ठंढी का मौसम है
मगर अबके बिजली की ज़रुरत नहीं
कोयला जहां है वही है 
बिजली तार में लापता है
संसद से पैगाम आया है
सब चिल्ला चिल्ला कर गर्मी पैदा करें
जब नहाना हो
गीजर चलाने के बजाये चिल्लाएं
और फिर नहाएं !
जब कपड़े प्रेस करने हो
कपड़े बिछाकर चिल्लाएं
फिर कपड़ों पे हथेली चलायें !
जब अँधेरे में देखना हो
आँख खोल कर चिल्लायें
और अँधेरा दूर भगाएं ! 

एक सांसद का कहना है
फॉसिल फ्यूल पे निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाये गयें थे
सभी देशों में इसपे काम चल रहा था
उसी कड़ी में अपने संसद भवन और राज्य भवन में भी बहस (रिसर्च)  हुई
जिसके फलस्वरूप इस नए अल्टरनेटिव एनर्जी सोर्स "चिल्लाना" का पता चल सका
सभी संसद अपनी सफलता पे गौरान्वित हैं
एक दूजे को बधाई दे रहे हैं -चिल्लाते हुए
संसद/राज्य भवन में बिजली की तारे उतारी जा रही हैं
एक सांसद ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा - ये सबसे टिकाऊ और सस्ता अल्टरनेटिव रिसोर्स है
सभी देशवासिओं को भरोसे में लेने के लिए
सरकार संसद में हुए इस सफल परिक्षण का वीडियो ज़ारी कर दी है

दुसरे सांसद से जब यह पूछा गया कि
राजस्व पे इसका असर पड़ेगा
तो उनका कहना है
- इस बारे में विचार हो रहा है,
कमेटी गठित कर दी  गयी है
उसके रिपोर्ट के अनुसार काम होगा और
चिल्लाहट नापी मशीन हर घर में इनस्टॉल कर दी जाएगी !
इससे अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होने को ले कर
सांसदजी ऑप्टिमिस्टिक हैं !
उन्हें केवल एक बात की दुख है
कि इसकी खोज अगर गर्मी में हो गयी होती तो
गर्मी काटने में बहुत सुविधा होती
चलो कोई नहीं …
गर्मी तो फिर आएगी !

चिल्लाने के नफे नुकसान के  बारे में जब उनसे पूछा गया तो
उनका कहना है
- इसके बारे में उन्होंने डॉक्टरों की सलाह ले ली है
चिल्लाने से वेट लॉस होता है
इसलिए जो जीम जाते हैं वे घर पे ही चिल्ला लिया करें
और घर में अगर अधिक मोटे लोग हों 
तो किसी गरीब के घर में जा के चिल्ला दिया करें!

सरकार इसे रोज़गार की समस्या का हल के तौर पे भी देख रही है 

इस खोज़ ने पूरे देश में एक नया जोश भर दिया है 
सारी जनता उत्साहित दिखाई देने लगी है
घर घर में बच्चे चिल्ला चिल्ला कर पढ़ने लगें हैं
बाथरूम गायकों की चाँदी हो गयी है
उनके चिल्ला के गाने पे अब किसी को कोई ऐतराज़ नहीं 

सभी मान रहे हैं उनका वोट बेकार नहीं गया
बिलकुल सही सांसद चुने हैं
और शहरों में रैलियां निकाली जा रही हैं
जिनमें नारा है -
"आओ चिल्लायें.... 
हाँ मिलजुल कर चिल्लायें.... 
तुम क्या सोच रहे हो पगले
तुम भी चिल्लाओ ....
हम भी चिल्लाएं
देश बचाएँ
आओ चिल्लायें..."

Tuesday, December 2, 2014

दिन कब बीता पता ही नहीं चला

दिन कब बीता पता ही नहीं चला
चाँद कब रूठा पता ही नहीं चला

सितारों से सदा बड़ी देर आई
बादल कब हटा पता ही नहीं चला

जिधर से भी गुज़रा काँटे ही चुना 
फूल कब खिला पता ही नहीं चला

पूरी बात हँसते हँसते ही हुई, उसे 
बुरा कब लगा पता ही नहीं चला

सफ़र के नज़ारे हमने साथ देखें
क्या कब चुभा पता ही नहीं चला

खुद से थोड़ी बात क्या की 'शादाब'
काफ़िला कब छूटा पता ही नहीं चला