
धीरे धीरे हमें पूरा बदला उसने
रंग बिरंगे फूल थे हमारे दामन में
एक एक करके सब छिना उसने
नशे की चादर पहना कर हमें
सोने को जागना बताया उसने
हिस्से में है अब कुछ यादे अपनी
ज़िन्दगी को तो ख़ाब बनाया उसने
हमारी नादानी थी जो भरोसा किया
विश्वास का खेल खूब रचाया उसने
अपने ही घर में नौकर हो गयें
हमें क्या से क्या बनाया उसने
अपनी खुशज़िन्दगी की किताब जो सौपी
तो हरेक पन्ने को ग़लत बताया उसने
देर सही मगर जो समझा हिसाब
हमें पागल कहके पुकारा उसने
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